छत्तीसगढ़
बाइक से गांजा तस्करी करने वाले दो आरोपियों को 15-15 साल की सजा
Shantanu Roy
9 Sept 2025 8:13 PM IST

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छग
Raipur. रायपुर। रायपुर में बाइक से गांजा तस्करी करने वाले दो आरोपियों को कोर्ट ने 15-15 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला अप्रैल 2021 में गरियाबंद जिले में सामने आया था, जब पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि ओडिशा से छुरा होते हुए रायपुर की ओर बाइक से गांजा तस्करी की जा रही है। जानकारी मिलने पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों की पहचान की और उन्हें हिरासत में लिया। तलाशी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से 34 किलो 500 ग्राम गांजा बरामद किया, जिसकी अनुमानित कीमत 1.70 लाख रुपये बताई गई। आरोपियों की पहचान गरियाबंद जिले के मनोज ईसाई और योगेश तारक के रूप में हुई। उनके पास से बरामद गांजा को देखते हुए पुलिस ने मामला दर्ज कर दोनों को जेल भेज दिया। करीब साढ़े तीन वर्षों तक चली सुनवाई के बाद, मंगलवार को एनडीपीएस स्पेशल कोर्ट के जज पंकज कुमार सिन्हा ने दोनों दोषियों को कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही कोर्ट ने दोनों पर 1.5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। यदि यह जुर्माना अदा नहीं किया गया, तो दोनों को अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।
एनडीपीएस एक्ट के मामले में सरकारी वकील केके चंद्राकर।
इस पूरे मामले में पुलिस ने पूरी सक्रियता दिखाई। विशेष लोक अभियोजक केके चंद्राकर ने अदालत में अभियोजन पक्ष की पैरवी की और अदालत में साक्ष्य, जब्ती और गवाहों के आधार पर अपराध सिद्ध कराया। अदालत ने माना कि यह मामला मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़ा गंभीर अपराध है, जो समाज में नशे के प्रसार और युवाओं को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधि है। इसलिए कठोर दंड दिया जाना आवश्यक है। पुलिस के अनुसार, ओडिशा से छुरा होते हुए रायपुर की दिशा में गांजा ले जाया जा रहा था। आरोपियों की बाइक की तलाशी लेने पर बोरे में गांजा बरामद हुआ। पुलिस ने मौके पर ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पता चला कि यह तस्करी नेटवर्क काफी समय से सक्रिय था और नशे की खेप विभिन्न जगहों पर पहुँचाई जाती थी। जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि आरोपियों का उद्देश्य अधिक मुनाफे के लिए युवाओं और अन्य वर्गों में नशे का सामान बेचना था। यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि समाज में अपराध और नशे के प्रसार का भी बड़ा कारण बनता है। अदालत ने कहा कि नशे से जुड़े अपराध समाज की जड़ों को प्रभावित करते हैं और इसलिए ऐसी गतिविधियों में शामिल लोगों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मादक पदार्थ अधिनियम के तहत यह अपराध गंभीर श्रेणी में आता है। ऐसे अपराधों से निपटने के लिए प्रशासन, पुलिस और समाज सभी को सतर्क रहना होगा। अभियोजन पक्ष की दलीलों और पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने मनोज ईसाई और योगेश तारक को दोषी करार दिया और उन्हें कठोर कारावास की सजा सुनाई। इस कार्रवाई से प्रशासन का संदेश साफ है कि नशे से जुड़े अपराधों को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस ने कहा कि भविष्य में भी इस तरह के अपराधों पर नकेल कसने के लिए अभियान चलाया जाएगा। साथ ही, नागरिकों से अपील की गई है कि नशे से जुड़े अपराध की जानकारी मिलने पर तत्काल पुलिस को सूचित करें। समाज में नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाना भी आवश्यक है। युवाओं में नशे की बढ़ती लत को रोकने के लिए परिवार, प्रशासन और समाज को मिलकर काम करना होगा। यह मामला स्पष्ट करता है कि पुलिस की तत्परता और अदालत की सख्ती से नशे की तस्करी पर नियंत्रण पाया जा सकता है। इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी साबित कर दिया है कि मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ प्रशासन और न्यायपालिका मिलकर प्रभावी कदम उठा रही है। सजा की यह घोषणा समाज में सुरक्षा का भरोसा बढ़ाएगी और अपराधियों को चेतावनी देगी कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।
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